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संपूर्ण ज़ियारत गाइड

चाहे यह आपकी पहली ज़ियारत हो या दसवीं, यह गाइड आपको पवित्र स्थलों और उनके इतिहास से परिचित कराती है ताकि आपकी ज़ियारत सार्थक और सूचित हो। शुरू करने के लिए नीचे अपनी भाषा चुनें।

सभी क़ुरआनी आयतों और अहादीस को प्रकाशन से पहले प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित किया जाता है।

यह अनुवाद मशीन-सहायित प्रारूप है, विद्वान समीक्षा के लिए लंबित। अरबी क़ुरआन आयतें व अहादीस अपरिवर्तित हैं; कुछ नाम अभी स्थानीय भाषा में नहीं लाए गए हैं।

अध्याय 1 · मक्का मुकर्रमा - परिचय

अध्याय 1 · मक्का मुकर्रमा - परिचय

मक्का मुकर्रमा इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यही वह जगह है जहाँ काबा स्थित है, जिसे अल्लाह तआला ने समस्त मानवता के लिए इबादत का केंद्र बनाया है। मक्का केवल एक शहर नहीं, बल्कि तौहीद, अमन और हिदायत की एक मुकम्मल व्यवस्था है।

1.1 काबा - इबादत का पहला घर

क़ुरआन

إِنَّ أَوَّلَ بَيْتٍ وُضِعَ لِلنَّاسِ لَلَّذِي بِبَكَّةَ مُبَارَكًا وَهُدًى لِلْعَالَمِينَ ۝ فِيهِ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ مَقَامُ إِبْرَاهِيمَ وَمَنْ دَخَلَهُ كَانَ آمِنًا

अनुवाद: निःसंदेह लोगों के लिए जो सबसे पहला घर नियत किया गया वही है जो मक्का (बक्का) में है, बरकत वाला और समस्त संसार के लिए मार्गदर्शन। इसमें स्पष्ट निशानियाँ हैं, मक़ाम-ए-इब्राहीम। और जो इसमें दाख़िल हुआ वह अमन में आ गया।

- सूरह आल-ए-इमरान (3:96-97)

  • काबा इबादत का पहला स्थान है
  • "बक्का" मक्का का प्राचीन नाम है
  • मक्का अमन और शांति की जगह है
  • हिदायत केवल अरबों के लिए नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए है

1.2 शहर की महानता

क़ुरआन

لَا أُقْسِمُ بِهَذَا الْبَلَدِ ۝ وَأَنتَ حِلٌّ بِهَذَا الْبَلَدِ

अनुवाद: मैं इस शहर (मक्का) की क़सम खाता हूँ, और (ऐ नबी ﷺ) आप इस शहर में निवास करते हैं।

- सूरह अल-बलद (90:1-2)

1.3 मक्का के लिए इब्राहीम अ॰स॰ की दुआ

क़ुरआन

وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ رَبِّ اجْعَلْ هَذَا بَلَدًا آمِنًا وَارْزُقْ أَهْلَهُ مِنَ الثَّمَرَاتِ

अनुवाद: और जब इब्राहीम अ॰स॰ ने दुआ की: ऐ मेरे रब! इस शहर को अमन वाला बना दे और इसके निवासियों को फलों का रिज़्क़ अता फ़रमा।

- सूरह अल-बक़रह (2:126)

1.4 मस्जिद-उल-हराम में नमाज़ का अज्र

हदीस

صَلَاةٌ فِي مَسْجِدِي هَذَا أَفْضَلُ مِنْ أَلْفِ صَلَاةٍ فِيمَا سِوَاهُ إِلَّا الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ، وَصَلَاةٌ فِي الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ أَفْضَلُ مِنْ مِائَةِ أَلْفِ صَلَاةٍ فِيمَا سِوَاهُ

मेरी इस मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी ﷺ) में एक नमाज़ दूसरी मस्जिदों की हज़ार नमाज़ों से अफ़ज़ल है, सिवाय मस्जिद-उल-हराम के। और मस्जिद-उल-हराम में एक नमाज़ दूसरी मस्जिदों की एक लाख नमाज़ों से अफ़ज़ल है।

स्रोत: सुनन इब्न माजाह, 1406

1.5 नबी ﷺ की मक्का से मुहब्बत

हदीस
अल्लाह की क़सम! तू अल्लाह की सबसे बेहतरीन धरती है और अल्लाह को सब धरतियों में सबसे प्रिय है। अगर मुझे (ज़बरदस्ती) न निकाला जाता तो मैं तुझे कभी न छोड़ता।

स्रोत: जामे तिर्मिज़ी, 3925 / सुनन इब्न माजाह, 3108

अध्याय 2 · उमरह

2.1 उमरह क्या है?

उमरह एक इबादत है जो मस्जिद-उल-हराम (मक्का) में अदा की जाती है। उद्देश्य के लिहाज़ से उमरह को "छोटा हज" भी कहा जाता है।

2.2 उमरह के लाभ क्या हैं?

हदीस
एक उमरह दूसरे उमरह तक उन गुनाहों का कफ़्फ़ारा है जो उनके बीच हों, और हज-ए-मबरूर का बदला जन्नत के सिवा कुछ नहीं।

स्रोत: सहीह बुख़ारी, 1773 / सहीह मुस्लिम, 1349a

2.4 उमरह के अरकान

  1. 1

    एहराम

    मीक़ात पर नीयत और एहराम का लिबास

  2. 2

    तवाफ़

    काबा के गिर्द सात चक्कर

  3. 3

    सई

    सफ़ा और मरवा के बीच सात फेरे

  4. 4

    हलक़ / क़स्र

    सिर मुँडवाना या बाल कटवाना

2.5 उमरह का सही तरीक़ा

एहराम

  • मीक़ात पर ग़ुस्ल (सुन्नत)
  • पुरुष: दो सफ़ेद बिना सिली चादरें
  • महिलाएँ: शालीन लिबास, चेहरा खुला
  • दिल से नीयत

तल्बिया

तल्बिया

لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ، لَا شَرِيكَ لَكَ

स्रोत: सहीह मुस्लिम, 1184

तवाफ़

  • काबा के गिर्द सात चक्कर (हजर-ए-अस्वद से शुरू)
  • पुरुष: पहले तीन चक्करों में तेज़ चाल (रमल)
  • हजर-ए-अस्वद को बोसा (यदि संभव हो) या इशारा
  • रुक्न-ए-यमानी से हजर-ए-अस्वद तक: रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतन…
  • दो रकअत नमाज़ (मक़ाम-ए-इब्राहीम के क़रीब)

सई (सफ़ा-मरवा)

क़ुरआन

إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللَّهِ

अनुवाद: निःसंदेह सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं।

- सूरह अल-बक़रह (2:158)

  • सफ़ा से शुरू, मरवा पर ख़त्म - सात फेरे
  • हरी रौशनियों के बीच: पुरुष तेज़ चलें, महिलाएँ सामान्य गति से

2.7 उमरह की अहम दुआएँ

दुआ

اللَّهُمَّ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

ऐ अल्लाह! हमें दुनिया में भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई, और हमें आग के अज़ाब से बचा।

स्रोत: सहीह बुख़ारी, 6389

अध्याय 3 · हज

3.1 हज क्या है?

क़ुरआन

وَلِلَّهِ عَلَى النَّاسِ حِجُّ الْبَيْتِ مَنِ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلًا

अनुवाद: और अल्लाह के लिए लोगों पर इस घर का हज फ़र्ज़ है, जो वहाँ तक पहुँचने की सामर्थ्य रखता हो।

- सूरह आल-ए-इमरान (3:97)

  • हज इस्लाम का पाँचवाँ स्तंभ है
  • यह केवल उन पर फ़र्ज़ है जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सामर्थ्य रखते हों
  • जीवन में केवल एक बार फ़र्ज़ है

3.4 हज के अरकान

  1. 1

    एहराम

    नीयत और एहराम का लिबास

  2. 2

    वुक़ूफ़-ए-अरफ़ा

    9 ज़ुल-हिज्जा - फ़र्ज़ रुक्न

  3. 3

    तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा

    फ़र्ज़ तवाफ़

  4. 4

    सई

    सफ़ा-मरवा

3.5 हज का सही तरीक़ा (चरणबद्ध)

8 ज़ुल-हिज्जा (यौम-ए-तर्विया) - मिना

  • मिना पहुँचें, पाँच नमाज़ें अदा करें
  • मिना में रात गुज़ारें (सुन्नत)

9 ज़ुल-हिज्जा (यौम-ए-अरफ़ा) - वुक़ूफ़-ए-अरफ़ा

अरफ़ा के बिना हज नहीं होता!

  • ज़ुहर से मग़रिब तक अरफ़ात में ठहराव - यह हज का सबसे बड़ा रुक्न है
  • दुआ, इस्तिग़फ़ार, तस्बीह
  • फिर मुज़दलिफ़ा की ओर रवानगी - मग़रिब और इशा को मिलाकर पढ़ें
  • मुज़दलिफ़ा में रात गुज़ारें (9-10 ज़ुल-हिज्जा की रात)
  • 70 कंकड़ जमा करें

10 ज़ुल-हिज्जा (यौम-ए-क़ुर्बानी) - 4 अमल

  1. रमी - केवल जमरत-उल-अक़बा (बड़ा स्तंभ) - 7 कंकड़
  2. क़ुर्बानी
  3. सिर मुँडवाना या बाल कटवाना
  4. तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा + सई

11-13 ज़ुल-हिज्जा (अय्याम-ए-तश्रीक़) - रमी

हर दिन तीनों जमरात को कंकड़ मारना:

जमराआकारकंकड़
जमरत-उल-ऊलाछोटा7 कंकड़
जमरत-उल-वुस्तामध्यम7 कंकड़
जमरत-उल-अक़बाबड़ा7 कंकड़

न्यूनतम अनिवार्य = 49 कंकड़ | पूर्ण सुन्नत = 70 कंकड़

अध्याय 4 · हज का विवरण और पवित्र स्थल

4.1 मस्जिद नमिरा - परिचय

मस्जिद नमिरा मक्का मुकर्रमा के क़रीब मैदान-ए-अरफ़ात में स्थित है। यही वह जगह है जहाँ नबी ﷺ ने हज्जत-उल-विदा के अवसर पर ऐतिहासिक ख़ुत्बा दिया, जिसमें इस्लाम की बुनियादी शिक्षाएँ स्पष्ट रूप से बयान हुईं।

अहम: मस्जिद नमिरा केवल 9 ज़ुल-हिज्जा (यौम-ए-अरफ़ा) को खुलती है - साल भर बंद रहती है। केवल इसी दिन अज़ान, ख़ुत्बा और ज़ुहर व अस्र की जमा नमाज़ अदा की जाती है।

4.2 जबल-ए-रहमत - परिचय

जबल-ए-रहमत अरफ़ात के मध्य में स्थित एक छोटी पहाड़ी है, जिसे "रहमत का पहाड़" भी कहा जाता है। यही वह स्थान है जहाँ हज़रत आदम अ॰स॰ और हव्वा (अलैहा सलाम) धरती पर उतरने के बाद पहली बार मिले।

4.3 मुज़दलिफ़ा - परिचय

मुज़दलिफ़ा अरफ़ात और मिना के बीच स्थित एक घाटी का नाम है। क़ुरआन में इसे "मशअर-उल-हराम" कहा गया है।

  • अरफ़ात के बाद मुज़दलिफ़ा में मग़रिब और इशा को मिलाकर पढ़ें
  • 9-10 ज़ुल-हिज्जा की रात (शब-ए-मुज़दलिफ़ा) - इबादत में रात गुज़ारें
  • फ़ज्र तक ठहरना वाजिब है
  • रमी के लिए 70 कंकड़ जमा करें

4.4 वादी-ए-मुहस्सिर - परिचय

वादी-ए-मुहस्सिर मुज़दलिफ़ा और मिना के बीच स्थित एक घाटी है - यह अस्हाब-ए-फ़ील की घटना की याद दिलाती है, जहाँ अल्लाह ने अबाबील पक्षियों के ज़रिए अज़ाब भेजा। यह इबरत और चिंतन का स्थान है।

4.5 मिना - परिचय

मिना मक्का की पवित्र घाटी है जहाँ हज के कई अहम अमल अदा किए जाते हैं: रमी-ए-जमरात, क़ुर्बानी, हलक़/क़स्र और अय्याम-ए-तश्रीक़।

4.6 मस्जिद-उल-ख़ैफ़ (मिना)

मस्जिद-उल-ख़ैफ़ मिना की प्राचीन और सबसे पवित्र मस्जिदों में से एक है। इसे "अंबिया की मस्जिद" भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ 70 या 100 अंबिया ने नमाज़ पढ़ी।

4.8 जमरात - परिचय

जमरात मिना में तीन स्थान हैं जहाँ हाजी शैतान का प्रतिनिधित्व करने वाले स्तंभों को कंकड़ मारते हैं - यह हज़रत इब्राहीम अ॰स॰ के अमल की यादगार है।

जमराविवरण
जमरत-उल-ऊलासबसे छोटा स्तंभ
जमरत-उल-वुस्तामध्यम स्तंभ
जमरत-उल-अक़बासबसे बड़ा स्तंभ

4.9 मस्जिद-उल-बैआ (अक़बा) - परिचय

मस्जिद-उल-बैआ मिना के क़रीब, जमरत-उल-अक़बा के पास स्थित है। यही वह जगह है जहाँ मदीना के अंसार ने नबी ﷺ से दो महान बैअतें कीं (नबूवत के 12वें और 13वें वर्ष)।

अध्याय 5 · क़ब्रिस्तान और मस्जिदें - पवित्र स्थल

हदीस - ज़ियारत-ए-क़ुबूर
मैंने तुम्हें क़ब्रों की ज़ियारत से रोका था, लेकिन अब उनकी ज़ियारत करो। - नबी ﷺ

स्रोत: सहीह मुस्लिम, 977

5.1 जन्नत-उल-मुअल्ला

जन्नत-उल-मुअल्ला मक्का मुकर्रमा का सबसे प्राचीन और सबसे पवित्र क़ब्रिस्तान है। यहाँ दफ़्न हैं: हज़रत ख़दीजा रज़ि॰, अबू तालिब, अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़ि॰, उम्म-ए-हानी रज़ि॰, और क़ुरैश के महान बुज़ुर्ग।

5.2 मस्जिद-उल-जिन्न

यहाँ जिन्नों के एक समूह ने नबी ﷺ की तिलावत सुनी और इस्लाम क़बूल किया, और आप की हिफ़ाज़त का अहद किया - इसी घटना की याद में यह मस्जिद बनाई गई।

5.3 मस्जिद शजर

यहाँ एक पेड़ ने नबी ﷺ को पहचाना, सलाम के लिए झुका, और आप की नबूवत की गवाही दी - इसी चमत्कारिक घटना के स्थान पर यह मस्जिद बनाई गई।

5.4 मस्जिद-उल-फ़तह (मस्जिद-उर-राया)

जबल-उल-फ़तह पर स्थित - फ़तह-ए-मक्का के अवसर पर यहाँ इस्लाम का झंडा बुलंद किया गया।

5.5 मस्जिद-उल-हिजाबा

यह मस्जिद "हिजाबा" से नामित है - अर्थात् काबा को खोलने, बंद करने और उसकी हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी। फ़तह-ए-मक्का के दिन नबी ﷺ ने फ़रमाया: "आज से काबा की कुंजी-रक्षा तुम्हारे पास रहेगी; क़यामत तक तुम्हारे हाथों में रहेगी।"

5.6 नबी ﷺ का जन्मस्थान - मस्जिद-उल-मौलिद

नबी ﷺ मक्का मुकर्रमा में बनू हाशिम के घर पैदा हुए। जन्म: 12 रबी-उल-अव्वल, आम-उल-फ़ील - लगभग 570 ईस्वी।

5.7 क़स्र-ए-सक़्फ़ (قَصْرُ السَّقِيفِ)

मक्का मुकर्रमा का एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल - बनू हाशिम के पुराने घरों से संबद्ध। "सक़्फ़" का अर्थ है छत या शरण।

5.8 मक़बरत-उल-अद्ल

मक्का का एक ऐतिहासिक क़ब्रिस्तान जहाँ इस्लामी दंड लागू किए जाते थे। क्षेत्र का नाम "अल-अद्ल" (न्याय) से लिया गया है।

5.9 शहीदों का क़ब्रिस्तान

मक्का में अल-जिअराना रोड के क़रीब स्थित - यहाँ विभिन्न ग़ज़वात के शहीद दफ़्न हैं।

5.10 वअद-उल-बनात - बेटियों को ज़िंदा दफ़्न करना

क़ुरआन

وَإِذَا الْمَوْءُودَةُ سُئِلَتْ ۝ بِأَيِّ ذَنبٍ قُتِلَتْ

अनुवाद: और जब ज़िंदा दफ़्न की गई लड़की से पूछा जाएगा कि वह किस गुनाह में मारी गई?

- सूरह अत-तकवीर (81:8-9)

जाहिलियत के दौर में कुछ अरब क़बीले अपनी बेटियों को ज़िंदा दफ़्न कर देते थे। नबी ﷺ के आगमन के बाद इस कृत्य को हराम क़रार दिया गया, और बेटियों को रहमत कहा गया।

5.11 मस्जिद तनईम (मस्जिद आयशा रज़ि॰)

मक्का का सबसे क़रीब मीक़ात - मक्का में निवास करने वाले यहाँ से उमरह का एहराम बाँधते हैं।

5.12 मस्जिद-उल-जिअराना

मक्का का एक अहम मीक़ात - मस्जिद तनईम के बाद सबसे प्रसिद्ध मीक़ात।

5.13 मस्जिद सुल्ह-ए-हुदैबिया

6 हिजरी में नबी ﷺ और क़ुरैश के बीच सुल्ह-ए-हुदैबिया का स्थल - यहीं बैअत-उर-रिज़्वान भी हुई।

क़ुरआन

لَقَدْ رَضِيَ اللَّهُ عَنِ الْمُؤْمِنِينَ إِذْ يُبَايِعُونَكَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ

अनुवाद: निःसंदेह अल्लाह मोमिनों से राज़ी हो गया जब वे पेड़ के नीचे आप से बैअत कर रहे थे।

- सूरह अल-फ़तह (48:18)

5.14 जबल-ए-नूर + ग़ार-ए-हिरा

यहाँ पहली वही नाज़िल हुई - सूरह अल-अलक़ (96:1-5)। इस्लाम का आरंभ इसी जगह हुआ।

5.15 जबल-ए-सौर + ग़ार-ए-सौर

हिजरत के अवसर पर नबी ﷺ और अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ि॰ ने यहाँ तीन रातें गुज़ारीं। अल्लाह की ख़ास हिफ़ाज़त में - मकड़ी के जाले और कबूतर के अंडों की चमत्कारिक घटनाएँ।

क़ुरआन

إِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِهِ لَا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا

अनुवाद: जब वे अपने साथी से कह रहे थे: ग़म न कर, निःसंदेह अल्लाह हमारे साथ है।

- सूरह अत-तौबा (9:40)

5.16 जबल-ए-ख़ंदमा

मक्का का एक ऐतिहासिक पहाड़ - फ़तह-ए-मक्का के अवसर पर नबी ﷺ ने शहर में दाख़िल होने के लिए इसके क़रीब का रास्ता चुना।

5.17 किस्वा संग्रहालय

किस्वा (काबा का काला रेशमी ग़िलाफ़) के लिए समर्पित एक भव्य संग्रहालय। हर वर्ष 9 ज़ुल-हिज्जा को पुराना किस्वा उतारकर नया चढ़ाया जाता है - जिस पर सोने और चाँदी के तारों से क़ुरआनी आयतें उत्कीर्ण होती हैं।

5.18 ज़ुबैदा की नहर

सय्यदा ज़ुबैदा बिन्त जाफ़र (अब्बासी ख़लीफ़ा हारून-उर-रशीद की पत्नी) ने ताइफ़ के पहाड़ों से मक्का तक एक भव्य जल-नहर के निर्माण का व्यक्तिगत ख़र्च उठाया - हाजियों की सेवा के लिए। अपने युग की सबसे बड़ी लोक-कल्याण परियोजना।

अध्याय 6 · ताइफ़ - पवित्र स्थल

6.1 ताइफ़ का परिचय

ताइफ़ सऊदी अरब का एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक शहर है - मक्का के पूर्व में सरावात पहाड़ों में स्थित। नबूवत के दसवें वर्ष नबी ﷺ ने ताइफ़ की यात्रा की। ताइफ़ के लोगों ने आप पर पत्थर बरसाए - फिर भी नबी ﷺ ने उन पर लानत नहीं की बल्कि उनके लिए रहमत की दुआ की।

"ताइफ़ वह शहर है जहाँ पत्थर बरसाए गए, मगर जवाब में दुआएँ बुलंद हुईं - और जहाँ तकलीफ़ दी गई, मगर इसी से रहमत के एक नए दौर का आरंभ हुआ।"

6.2 हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ि॰ - परिचय

नबी ﷺ के चचेरे भाई - इस्लाम में "तर्जुमान-उल-क़ुरआन" के नाम से प्रसिद्ध। 68 हिजरी में ताइफ़ में इंतिक़ाल हुआ और वहीं दफ़्न हुए - बाद में स्थल पर मक़बरा और मस्जिद बनाई गई।

दुआ-ए-नबवी

اللَّهُمَّ عَلِّمْهُ الْحِكْمَةَ وَتَأْوِيلَ الْكِتَابِ

ऐ अल्लाह! इसे दीन की समझ अता फ़रमा और क़ुरआन की व्याख्या सिखा।

स्रोत: सुनन इब्न माजाह, 166

6.3 वादी-ए-मस्ना

यह वह घाटी है जहाँ नबी ﷺ ताइफ़ की कठिन परीक्षा के बाद ठहरे और अल्लाह से यह प्रसिद्ध दुआ की:

दुआ-ए-ताइफ़

اللَّهُمَّ إِلَيْكَ أَشْكُو ضَعْفَ قُوَّتِي وَقِلَّةَ حِيلَتِي وَهَوَانِي عَلَى النَّاسِ

ऐ अल्लाह! मैं केवल तुझ से अपनी कमज़ोरी, बेबसी और लोगों के सामने अपनी बेक़द्री की शिकायत करता हूँ।

स्रोत: अत-तबरानी

6.4 मस्जिद-ए-अद्दास

जहाँ अद्दास रज़ि॰ (एक सेवक) ने नबी ﷺ को अंगूर पेश किए और "बिस्मिल्लाह" सुनकर इस्लाम क़बूल किया - इस्लामी दावत के इतिहास का एक नाज़ुक मगर गहरा प्रभाव रखने वाला क्षण।

6.5 मस्जिद-ए-अली रज़ि॰ (ताइफ़)

ताइफ़ के पुराने शहर के क़रीब स्थित - हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़ि॰ से संबद्ध।

6.6 मस्जिद-ए-रसूल ﷺ

पुराने शहर के क़रीब स्थित - नबी ﷺ की ताइफ़ यात्रा से संबद्ध स्थल।

6.7 मस्जिद वादी-ए-रहमा

ताइफ़ की प्रसिद्ध वादी-ए-रहमा में स्थित - वह जगह जहाँ अल्लाह की रहमत ने नबी ﷺ को सुकून बख़्शा।

6.8 मस्जिद क़र्न-उल-मनाज़िल (मीक़ात-ए-नज्द)

ताइफ़ के क़रीब स्थित - अहल-ए-नज्द के लिए नियत मीक़ात (हज या उमरह के एहराम की सीमा)।

6.9 अल-शफ़ा

अल-शफ़ा ताइफ़ का सबसे ऊँचा और सबसे प्रसिद्ध ऊपरी क्षेत्र है - सरावात पहाड़ों का हिस्सा। सुहावने मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध।

6.10 सूक़ उकाज़

अरब जगत का प्राचीन और प्रसिद्ध बाज़ार - व्यापार, साहित्य, कविता और क़ानूनी मध्यस्थता का केंद्र।

6.11 बाब अल-राया (باب الريع)

प्राचीन ताइफ़ का प्रसिद्ध शहरी द्वार - कभी ताइफ़ की प्राचीर का हिस्सा था।

6.12 ताइफ़ के गुलाब के बाग़ (ورد الطائف)

वर्द-ए-ताइफ़ (ताइफ़ का गुलाब) - गुलाब की एक विश्व-प्रसिद्ध क़िस्म। शफ़ा और हदा के आसपास उगाया जाता है - सदियों से इत्र और सुगंध के लिए।

अध्याय 7 · मदीना मुनव्वरा - पवित्र स्थल

अध्याय 7 · मदीना मुनव्वरा - पवित्र स्थल

7.1 मदीना मुनव्वरा

इस्लाम का दूसरा सबसे पवित्र शहर - यहाँ नबी ﷺ ने इस्लामी समाज की बुनियाद रखी। इसका पुराना नाम यसरिब था; हिजरत के बाद इसे "मदीनत-उन-नबी ﷺ" (नबी का शहर) कहा गया।

हदीस

اللَّهُمَّ حَبِّبْ إِلَيْنَا الْمَدِينَةَ كَحُبِّنَا مَكَّةَ أَوْ أَشَدَّ

ऐ अल्लाह! हमें मदीना से ऐसी मुहब्बत अता फ़रमा जैसी मक्का से है, या उससे भी अधिक।

स्रोत: सहीह बुख़ारी, 1889

7.2 रियाज़-उल-जन्नह

हदीस
मेरे घर (हुजरा) और मेरे मिंबर के बीच जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ है, और मेरा मिंबर मेरे हौज़ पर होगा। - नबी ﷺ

स्रोत: सहीह मुस्लिम, 1391

7.3 जन्नत-उल-बक़ी

मस्जिद-ए-नबवी के बिल्कुल साथ पवित्र क़ब्रिस्तान - यहाँ दफ़्न हैं:

उम्महात-उल-मोमिनीन रज़ि॰ (जन्नत-उल-बक़ी में)

  • हज़रत आयशा रज़ि॰
  • हज़रत हफ़्सा रज़ि॰
  • हज़रत उम्म-ए-सलमा रज़ि॰
  • हज़रत ज़ैनब बिन्त जहश रज़ि॰
  • हज़रत ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा रज़ि॰
  • हज़रत जुवैरिया रज़ि॰
  • हज़रत सफ़िय्या रज़ि॰
  • हज़रत उम्म-ए-हबीबा रज़ि॰
  • हज़रत सौदा रज़ि॰

हज़रत ख़दीजा रज़ि॰ - मक्का (जन्नत-उल-मुअल्ला) में दफ़्न | हज़रत मैमूना रज़ि॰ - सरिफ़ (मक्का के क़रीब) में दफ़्न

अहल-ए-बैत रज़ि॰ (जन्नत-उल-बक़ी में)

  • हज़रत फ़ातिमा रज़ि॰ (नबी ﷺ की बेटी)
  • हज़रत हसन बिन अली रज़ि॰
  • हज़रत अब्बास रज़ि॰ (नबी ﷺ के चाचा)
  • हज़रत अली ज़ैन-उल-आबिदीन (रहिमहुल्लाह)
  • हज़रत मुहम्मद अल-बाक़िर (रहिमहुल्लाह)
  • हज़रत जाफ़र अस-सादिक़ (रहिमहुल्लाह)

प्रसिद्ध सहाबा रज़ि॰ (जन्नत-उल-बक़ी में)

  • हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ि॰ (तीसरे ख़लीफ़ा)
  • हज़रत सअद बिन अबी वक़्क़ास रज़ि॰
  • हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ रज़ि॰
  • हज़रत असअद बिन ज़ुरारा रज़ि॰ (पहले अंसारी)
  • हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ि॰

7.4 मस्जिद-उल-ग़मामा

मस्जिद-ए-नबवी के क़रीब स्थित - नबी ﷺ ने यहाँ ईद और इस्तिस्क़ा (बारिश की दुआ) की नमाज़ पढ़ी। बारिश के लिए बादलों के जमा होने के कारण इसे "ग़मामा" (अर्थात्: बादल) कहा गया।

7.5 मस्जिद अबू बक्र रज़ि॰

मस्जिद-उल-ग़मामा के क़रीब स्थित - नबी ﷺ के बाद हज़रत अबू बक्र रज़ि॰ ने यहाँ ईद की नमाज़ें पढ़ाईं।

7.6 मस्जिद बिलाल रज़ि॰

इस्लाम के पहले मुअज़्ज़िन हज़रत बिलाल बिन रबाह रज़ि॰ से संबद्ध - नबी ﷺ के इंतिक़ाल के बाद अज़ान देना उनके लिए अत्यंत कष्टदायक हो गया।

7.7 मस्जिद अली रज़ि॰ (मदीना)

हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़ि॰ से संबद्ध - नबी ﷺ के चचेरे भाई, दामाद, और चौथे ख़लीफ़ा-ए-राशिद।

7.8 मस्जिद-ए-जुमा

हिजरत के बाद नबी ﷺ ने पहली जुमा की नमाज़ यहाँ पढ़ी - क़ुबा से मदीना जाते हुए।

7.9 मस्जिद-ए-क़ुबा

इस्लाम की पहली मस्जिद - हिजरत के बाद नबी ﷺ ने सबसे पहले इसी मस्जिद की बुनियाद रखी।

हदीस - फ़ज़ीलत
जो व्यक्ति घर में वुज़ू करे फिर मस्जिद-ए-क़ुबा आकर नमाज़ पढ़े, उसे उमरह के बराबर अज्र मिलेगा।

स्रोत: सुनन इब्न माजाह, 1412

7.10 अँगूठी वाला कुआँ (बिर-उल-ख़ातम)

नबी ﷺ की चाँदी की अँगूठी से संबद्ध (जिस पर "मुहम्मद रसूल अल्लाह" उत्कीर्ण था)। रिवायात के अनुसार यह हज़रत उस्मान रज़ि॰ के दौर में इस कुएँ में गिर गई।

7.11 बिर-ए-रूमा

हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ि॰ ने यह कुआँ ख़रीदकर अल्लाह की राह में वक़्फ़ कर दिया - इस्लामी इतिहास में सदक़ा जारिया का सबसे बड़ा अमल।

7.12 बिर-ए-ग़र्स

नबी ﷺ का पसंदीदा जल-स्रोत - आप ने वसीयत फ़रमाई कि इंतिक़ाल के बाद आप का ग़ुस्ल बिर-ए-ग़र्स के पानी से दिया जाए।

7.13 बुस्तान-उल-मुस्तक़बिल

मदीना का एक आधुनिक सार्वजनिक पार्क - बच्चों के खेलने की जगहों और वॉकिंग ट्रैक के साथ पारिवारिक वातावरण। यह कोई धार्मिक स्थल नहीं बल्कि शहर का आधुनिक मनोरंजन पार्क है।

7.14 मस्जिद-ए-क़िबलतैन

वह जगह जहाँ नमाज़ के दौरान क़िबला बदला गया - बैत-उल-मक़दिस से काबा की ओर। "क़िबलतैन" का अर्थ: दो क़िबले।

अंदर दो मेहराबें हैं - पुराना और नया क़िबला। मस्जिद-ए-नबवी ﷺ से लगभग 5 किलोमीटर।

7.15 जबल-ए-ख़ंदक़ + सात मस्जिदें

ग़ज़वा-ए-ख़ंदक़ (अहज़ाब) - 5 हिजरी में 10,000 से अधिक दुश्मन सेना ने 3,000 मुसलमानों का सामना किया - हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ि॰ के परामर्श पर ख़ंदक़ खोदी गई। अल्लाह ने आँधी और फ़रिश्तों के ज़रिए मुसलमानों की मदद की।

मसाजिद-ए-सबआ (7 मस्जिदें)

  1. मस्जिद-उल-फ़तह (सबसे प्रसिद्ध)
  2. मस्जिद सलमान फ़ारसी
  3. मस्जिद अबू बक्र
  4. मस्जिद उमर
  5. मस्जिद अली
  6. मस्जिद सअद बिन मुआज़ रज़ि॰
  7. मस्जिद सअद बिन उबादा रज़ि॰

7.17 जबल-ए-उहुद / ग़ज़वा-ए-उहुद

हदीस
उहुद एक पहाड़ है जो हमसे मुहब्बत करता है और हम उससे मुहब्बत करते हैं। - नबी ﷺ

स्रोत: सहीह मुस्लिम, 1393

3 हिजरी - अबू सुफ़ियान के नेतृत्व में 3,000 का लश्कर बनाम 700 मुसलमान। जब तीरंदाज़ों ने अपनी जगहें छोड़ दीं तो दुश्मन ने पीछे से हमला किया - युद्ध का रुख़ पलट गया। नबी ﷺ ज़ख़्मी हुए मगर बद-दुआ न की, केवल दुआ की: "ऐ अल्लाह! मेरी क़ौम को हिदायत दे।"

7.20 शहीदान-ए-उहुद का क़ब्रिस्तान

ग़ज़वा-ए-उहुद में 70 सहाबा रज़ि॰ शहीद हुए - यहाँ दफ़्न हैं।

सय्यिद-उश-शुहदा - हज़रत हमज़ा बिन अब्दुल-मुत्तलिब रज़ि॰

नबी ﷺ के चाचा - इस ग़ज़वे के सबसे बड़े शहीद - नबी ﷺ ने उन्हें "सय्यिद-उश-शुहदा" का ख़िताब अता फ़रमाया।

शहीदान-ए-उहुद
#नामसमूह
1हज़रत हमज़ा बिन अब्दुल-मुत्तलिब रज़ि॰ (सय्यिद-उश-शुहदा)मुहाजिरीन
2मुसअब बिन उमैरमुहाजिरीन
3अब्दुल्लाह बिन जहशमुहाजिरीन
4आमिर बिन अबी वक़्क़ासमुहाजिरीन
5सफ़वान बिन बैज़ामुहाजिरीन
6सुहैल बिन बैज़ामुहाजिरीन
7अक़ील बिन बुकैरमुहाजिरीन
8आमिर बिन बुकैरमुहाजिरीन
9राफ़ेअ बिन मुअल्लामुहाजिरीन
10अबू हुज़ैफ़ा बिन उतबामुहाजिरीन
11सअद बिन रबीअअंसार - बनू औस
12अनस बिन नज़रअंसार - बनू औस
13हंज़ला बिन अबी आमिर (ग़सील-उल-मलाइका)अंसार - बनू औस
14अब्दुल्लाह बिन अमर बिन हरामअंसार - बनू औस
15हारिस बिन अतीकअंसार - बनू औस
16रिफ़ाआ बिन वक़्शअंसार - बनू औस
17मालिक बिन सिनानअंसार - बनू औस
18ज़ियाद बिन सकनअंसार - बनू औस
19यज़ीद बिन सकनअंसार - बनू औस
20अमर बिन मुआज़अंसार - बनू औस
21हारिस बिन सुहैबअंसार - बनू औस
22सहल बिन क़ैसअंसार - बनू औस
23साबित बिन वक़्शअंसार - बनू औस
24नुअमान बिन मालिकअंसार - बनू औस
25क़ैस बिन रबीअअंसार - बनू औस
26मसऊद बिन औसअंसार - बनू औस
27अब्दुल्लाह बिन सहलअंसार - बनू ख़ज़रज
28उबैद बिन साअलबाअंसार - बनू ख़ज़रज
29अब्दुल्लाह बिन जाबिरअंसार - बनू ख़ज़रज
30राफ़ेअ बिन मालिकअंसार - बनू ख़ज़रज
31हुबाब बिन मुंज़िरअंसार - बनू ख़ज़रज
32हारिस बिन अदीअंसार - बनू ख़ज़रज
33अब्दुल्लाह बिन क़ैसअंसार - बनू ख़ज़रज
34आमिर बिन ज़ियादअंसार - बनू ख़ज़रज
35हब्बाब बिन क़ैसअंसार - बनू ख़ज़रज
36जाबिर बिन अतीक़अंसार - बनू ख़ज़रज
37क़ैस बिन मालिकअंसार - बनू ख़ज़रज
38अमर बिन ज़ैदअंसार - बनू ख़ज़रज
39सालिम बिन उमैरअंसार - बनू ख़ज़रज
40अब्दुल्लाह बिन अतीक़रिवायती
41साबित बिन दख़शरिवायती
42हारिस बिन क़ैसरिवायती
43अब्दुल्लाह बिन क़तादारिवायती
44मसऊद बिन रबीअरिवायती
45ज़ैद बिन हारिसा (इख़्तिलाफ़)रिवायती
46अमर बिन सकनरिवायती
47अब्दुल्लाह बिन साबितरिवायती
48मालिक बिन क़ैसरिवायती
49नुअमान बिन साबितरिवायती

सभी 70 नामों पर विद्वानों की सहमति नहीं - विभिन्न रिवायात में अंतर है - लेकिन ये सब इस्लाम के महान शहीद हैं।

7.18 ग़ार-ए-उहुद + 7.19 मस्जिद-उल-फ़सीह

ग़ज़वा-ए-उहुद के बाद नबी ﷺ जबल-ए-उहुद की छोटी ग़ार (ग़ार-ए-उहुद) में आराम फ़रमा हुए - जबकि सहाबा रज़ि॰ पहरा देते रहे। मस्जिद-उल-फ़सीह इस ग़ार के नीचे है - बाद में बनाई गई - उस स्थल की निशानदेही करती है जहाँ नबी ﷺ ने नमाज़ पढ़ी।

7.21 हज़रत फ़ातिमा रज़ि॰ का घर

मस्जिद-ए-नबवी ﷺ की पूर्वी ओर - अब मस्जिद-ए-नबवी के विस्तार में शामिल। एक अत्यंत छोटा और सादा घर - यहाँ इमाम हसन रज़ि॰ और इमाम हुसैन रज़ि॰ की परवरिश हुई।

अध्याय 8 · बद्र - पवित्र स्थल

8.1 ग़ज़वा-ए-बद्र

17 रमज़ान, 2 हिजरी - इस्लाम का पहला और निर्णायक ग़ज़वा। मदीना से लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में। मुसलमान: 313 (2 घोड़े, 70 ऊँट) बनाम क़ुरैश: 1,000।

उद्देश्य क़ाफ़िला था, युद्ध नहीं - मगर क़ुरैश ने युद्ध थोप दिया। अल्लाह ने मदद के लिए 1,000 फ़रिश्ते भेजे - 70 काफ़िर मारे गए, 70 क़ैद हुए, और 14 मुसलमान शहीद हुए।

8.2 मस्जिद-उल-अरीश

मैदान-ए-बद्र के क़रीब स्थित - जहाँ नबी ﷺ ने बद्र के दिन इतनी शिद्दत से दुआ की कि आप की चादर कंधों से गिर गई - हज़रत अबू बक्र रज़ि॰ ने तसल्ली दी: "ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ, अल्लाह अपना वादा पूरा फ़रमाएगा।"

8.3 फ़रिश्तों का नुज़ूल (नुसरत-ए-इलाही)

क़ुरआन

إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُم بِأَلْفٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ

अनुवाद: जब तुम अपने रब से फ़रियाद कर रहे थे तो उसने तुम्हारी दुआ क़बूल फ़रमाई: मैं एक हज़ार फ़रिश्तों से, एक के बाद एक, तुम्हारी मदद करूँगा।

- सूरह अल-अनफ़ाल (8:9)

8.4 शहीदान-ए-बद्र का क़ब्रिस्तान

मैदान-ए-बद्र के क़रीब स्थित - यहाँ 14 सहाबा रज़ि॰ दफ़्न हैं।

शहीदान-ए-बद्र
#नामसमूह
1उमैर बिन अबी वक़्क़ास रज़ि॰मुहाजिरीन
2सफ़वान बिन अल-बैज़ा रज़ि॰मुहाजिरीन
3राफ़ेअ बिन अल-मुअल्ला रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
4सअद बिन ख़ैसमा रज़ि॰अंसार - बनू औस
5मुबश्शिर बिन अब्दुल मुंज़िर रज़ि॰अंसार - बनू औस
6हारिस बिन अतीक रज़ि॰अंसार - बनू औस
7मुआज़ बिन अफ़रा रज़ि॰अंसार - बनू औस
8यज़ीद बिन अल-हारिस रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
9सुहैल बिन अल-बैज़ा रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
10औफ़ बिन अफ़रा रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
11मुअव्विज़ बिन अफ़रा रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
12हारिस बिन सुराक़ा रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
13हारिस बिन औफ़ रज़ि॰अंसार - बनू ख़ज़रज
14ज़क्वान बिन अब्द क़ैस रज़ि॰अंसार

परिशिष्ट · नबी ﷺ की अज़वाज व औलाद

नबी ﷺ की अज़वाज (उम्महात-उल-मोमिनीन) - 11 अज़वाज

नबी ﷺ के इंतिक़ाल के समय 9 अज़वाज जीवित थीं।

  1. 1

    हज़रत ख़दीजा बिन्त ख़ुवैलिद रज़ि॰

    निकाह: नबी ﷺ की आयु 25 | ख़दीजा रज़ि॰ की आयु 40 | पहला और सबसे लंबा निकाह (25 वर्ष) | सबसे पहले इस्लाम क़बूल करने वालीं

  2. 2

    हज़रत सौदा बिन्त ज़मआ रज़ि॰

    निकाह: नबी ﷺ की आयु 50 | वे एक विधवा थीं जिनका कोई सहारा न था

  3. 3

    हज़रत आयशा बिन्त अबी बक्र रज़ि॰

    मंगनी: आयु 6 | रुख़्सती: आयु 9 | नबी ﷺ की आयु: लगभग 53

  4. 4

    हज़रत हफ़्सा बिन्त उमर रज़ि॰

    निकाह: नबी ﷺ की आयु 54 | एक शहीद की विधवा

  5. 5

    हज़रत ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा रज़ि॰

    निकाह: आयु 55 | ख़िताब: उम्म-उल-मसाकीन (ग़रीबों की माँ) | इंतिक़ाल: 8 माह बाद

  6. 6

    हज़रत उम्म सलमा रज़ि॰

    निकाह: आयु 56 | बच्चों वाली विधवा

  7. 7

    हज़रत ज़ैनब बिन्त जहश रज़ि॰

    निकाह: आयु 57 | विशेष: क़ुरआन में अल्लाह का आदेश (सूरह अहज़ाब)

  8. 8

    हज़रत जुवैरिया बिन्त हारिस रज़ि॰

    निकाह: आयु 58 | प्रभाव: उनका पूरा क़बीला आज़ाद हुआ

  9. 9

    हज़रत उम्म हबीबा रज़ि॰

    निकाह: आयु 59 | निकाह की रस्म हबशा में हुई

  10. 10

    हज़रत सफ़िय्या बिन्त हुयय रज़ि॰

    निकाह: आयु 59 | वंश: एक यहूदी परिवार से

  11. 11

    हज़रत मैमूना बिन्त हारिस रज़ि॰

    निकाह: आयु 60 | अंतिम निकाह

नबी ﷺ की औलाद - कुल 7

#नाममाताइंतिक़ाल
1हज़रत क़ासिम रज़ि॰हज़रत ख़दीजा रज़ि॰बचपन (2 वर्ष से कम)
2हज़रत अब्दुल्लाह रज़ि॰हज़रत ख़दीजा रज़ि॰बचपन
3हज़रत ज़ैनब रज़ि॰हज़रत ख़दीजा रज़ि॰31 वर्ष की आयु में
4हज़रत रुक़य्या रज़ि॰हज़रत ख़दीजा रज़ि॰22 वर्ष की आयु में
5हज़रत उम्म कुलसूम रज़ि॰हज़रत ख़दीजा रज़ि॰29 वर्ष की आयु में
6हज़रत फ़ातिमा रज़ि॰हज़रत ख़दीजा रज़ि॰आयु 29 - नबी ﷺ के इंतिक़ाल के 6 माह बाद
7हज़रत इब्राहीम रज़ि॰मारिया अल-क़िब्तिया रज़ि॰18 माह की आयु में

अज़वाज की औलाद (विवरण)

हज़रत ज़ैनब रज़ि॰

पति: अबुल आस बिन रबी | औलाद: अली रज़ि॰ (बचपन में इंतिक़ाल), उमामा रज़ि॰

हज़रत रुक़य्या रज़ि॰

पति: हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ि॰ | औलाद: अब्दुल्लाह रज़ि॰ (बचपन में इंतिक़ाल)

हज़रत उम्म कुलसूम रज़ि॰

पति: हज़रत उस्मान रज़ि॰ | कोई औलाद नहीं

हज़रत फ़ातिमा रज़ि॰

पति: हज़रत अली बिन अबी तालिब रज़ि॰ | औलाद: हसन रज़ि॰, हुसैन रज़ि॰, मुहसिन रज़ि॰ (मृत), ज़ैनब रज़ि॰, उम्म कुलसूम रज़ि॰

समापन

यह गाइड किसी दिखावे के दावे के लिए नहीं लिखी गई, बल्कि केवल और केवल उम्मत-ए-मुस्लिमा के सही मार्गदर्शन के लिए तैयार की गई है।

इसमें उल्लिखित समस्त ज़ियारात, घटनाएँ और पवित्र स्थल क़ुरआन, सहीह अहादीस और विश्वसनीय रिवायात के प्रकाश में प्रस्तुत किए गए हैं।

हमारा प्रयास रहा है कि यह यात्रा केवल स्थलों की सैर न हो, बल्कि ईमान, चिंतन और यक़ीन की यात्रा हो - जहाँ हर क़दम पर नबी ﷺ की शिक्षाएँ, सहाबा रज़ि॰ की क़ुर्बानियाँ, और इस्लाम की रूह महसूस हो।

آمِيْن يَا رَبَّ الْعَالَمِيْن